Tuesday, January 15, 2013

तुम खुशबुओं का कारवां हो


तुम खुशबुओं का कारवां हो
तुम दूर फैला वो आसमां हो

तुम चाहतों की वो नदी हो
तुम बह चली न जाने कहीं हो

तुममे कहीं कुछ तो बात है
बातों में ही कुछ वो राज़ है

तुम जब जो चाहो बस वो हो ही जाता
न चाहे पर वो फूल खिल ही जाता

ऐसा जो तुममे खास क्या है
न है किसी में वो बात क्या है

तुम हँसो तो रंग बरसे
सात रंग आसमान से छलके

तुम बन गए रंगीन आसमान हो
कई सूरजों का आशियाँ हो

पर उन तारों को तुम कभी न भूले
बातें उनकी  तुम कभी न भूले


खूबियाँ तुममे ये सारी अब हैं
राजों की सारी बातें ये अब हैं


जैसे हो तुम बस वैसे ही रहना
ख्वाहिशों के पंख लेकर उड़ते ही रहना

क्योंकि...

तुम खुशबुओं का कारवां हो
 तुम दूर फैला वो आसमान हो.