Friday, June 7, 2013

चलो अब शाम होने दो




 इस उजाले को सोना है
अँधेरे के गोद में .
चलो अब शाम होने दो ...

उठेगा ये, जो अगली सुबह
कोई ख़ूबसूरत - सी  रौशनी बनकर
चलो अब इस रात को संवरने - निखरने दो ...

ये , की हर बार लफ़्ज़ों से भी ,
बे- इन्तेहाँ उम्मीद बेमानी है
चलो इस बार उनको भी
खामोशियों की बाँहों में सुकून लेने दो ....

अब कितने राजों को दबाना होगा
दिल की गहरी तलहटी में ?
कोई तो है - जो है वहां भी
ये बेज़ान कोशिशें अब जाया होने दो ...

ज़ज्बातों के तूफ़ान में
मुलाकातों  का दम तोडना ,
अक्सर लाज़मी है
शायद ये तूफ़ान अभी ज़ोरों पर है
चलो, इस तूफ़ान को अब थमने दो........

इस उजाले को सोना है
अँधेरे के गोद में .
चलो अब शाम होने दो .........