Friday, August 23, 2013

'तस्वीरें' - अक्सर बोलती हैं.

तस्वीरें-
अक्सर बोलती हैं.
होंठों पर तैरती कोई अनकही बात
दिल की तलहटी में दबे कोई राज़
जब - तब वो अक्सर खोलती हैं

तस्वीरें जब भी सामने आती हैं
वो नए लफ़्ज़ों में रक्स करती हैं
कभी इस लम्हे को 'उस पर पार' ले जाना
कभी 'उस पार के लम्हे' को करीब ले आना
तसवीरें  यादों से अक्सर खेलती हैं

आशना हो कोई मुस्कराहट
या हो कोई अजनबी सी चाहत
तस्वीरें हर पयाम समझ लेती हैं

जब कभी- भी हो पीछे मुड़ कर,
 देखने  की चाहत
या अपने माजी को ,
 फिर से जीने की छटपटाहट   
तस्वीरें 'आज' के बियाँबान में
' कल' के गुलशन को रोशन कर देती हैं

 वक़्त से हार जाना,
 जिनकी फितरत नहीं
पर वक़्त से जीत जाना,
 जिनकी चाहत नहीं
ये तस्वीरें वक़्त से भी इश्क कर लेती हैं

चाहे किसी मुस्कराहट का टुकड़ा,
 गिर गया  हो
या किसी बात का सिलसिला,
 टूट गया हो
आँखों के किसी कोने में
शुक्र है !
कुछ तस्वीरें अब  भी हैं
जो मुलाक़ात होने पर अक्सर बोलती हैं

'तस्वीरें' -
अक्सर बोलती हैं.


तस्वीरें-
अक्सर बोलती हैं.
होंठों पर तैरती कोई अनकही बात
दिल की तलहटी में दबे कोई राज़
जब - तब वो अक्सर खोलती हैं






आशना - परिचित ( someone/ something who/which is known)
पयाम  -  सन्देश  (message) 
रक्स  - नृत्य        ( dance )

बियाबान - जंगल  ( jungle, forest)